संकट चौथ व्रत की कथा Story of Sankat Chauth

संकट चौथ व्रत की कथा
संकट चौथ व्रत की कथा

संकट चौथ व्रत की कथा : मेरे प्रिय भक्तगणो आज में आपको यह संकट चौथ व्रत की कहानी के बारे में बताने जा रही हूँ , संकट चौथ को कई अन्य नामो से भी जाना जाता है। जैसे – “‘ संकट चौथ कथा , तिलचटका व्रत कथा ,संकट चतुर्थी व्रत कथा आदि से भी जाना जाता हैं। संकट चौथ व्रत इस बार 10 जनवरी ,2023 को दिन मगंल वार को पड़ा है ,यह कृष्ण पक्ष की माह को जो दिन पड़ता हैं। संकट चौथ व्रत कहलाता हैं। इस दिन संकट चौथ माता की पूजा की है। और श्री गणेश जी भगवान की भी पूजा -अर्चना की जाती है।

और यह व्रत स्त्रीओ द्वारा किया जाता है। इस दिन स्त्रियाँ संकट चौथ व्रत करती हैं।
और यह अपने पति और बच्चो के लिए करती है इस व्रत करने से पति और बच्चो के सभी कस्ट दूर हो जाते है। और घर में सुःख सम्रद्धि बनी रहती हैं।

संकट चौथ कब है ?

माह – शुकल पक्ष

व्रत – संकट चौथ
साल – 2023
दिन – मंगलवार
दिनांक – 10
चाँद उदय का समय – 8 : 22

संकट चौथ व्रत कथा Story of Sankat Chauth

एक साहूकार की बहू की कहानी

चौथ माता का व्रत

संकट चौथ व्रत कथा: एक समय की बात है एक गांव में एक साहूकार का परिवार रहा करता था। उस के घर में साहूकार और उसका बेटा और बेटे की बहू रहा करते थे। उस बहू का यह नियम था की वह अपने घर में सभी को भोजन कराने के बाद ही खुद भोजन किया करती थी।

एक समय की बात है एक गांव में एक साहूकार का परिवार रहा करता था। उस के घर में साहूकार और उसका बेटा और बेटे की बहू रहा करते थे। उस बहू का यह नियम था की वह अपने घर में सभी को भोजन कराने के बाद ही खुद भोजन किया करती थी।

एक दिन उनके घर उनकी पड़ोसन आई और बोली – ” बहू से आज तुम्हारे घर में क्या बना है ? बहू ने कहा – ” बासी खाना बना है। और वह पूछ के चली जाती है।
और अगले दिन वह पड़ोसन फिर आई और बोली – ” आज आपके घर क्या बना है ?
बहू ने कहा – ” बासी खाना बना है। “

अगले दिन संकट चौथ व्रत का दिन था ,घर में अलग – अलग प्रकार के खाने बने थे ,उसके पति ने सोचा आज में देखता हूँ की ,आज मेरी पत्नी उस पड़ोसन से क्या कहेगी ?
और शाम होते ही उनकी पड़ोसन फिर आए और बोली – ” आज आपके घर क्या बना हैं ? “

बहू ने कहा – ” बासी खाना बना है ,”
और वह पड़ोसन वहाँ से चली जाती है ,
और फिर उसके पति ने अपनी पत्नी से पूछा – तुमने ऐसा क्यों कहा की हमारे घर में बासी खाना बना है ?

पत्नी ने कहा – अभी तो हम बाप दादा दी कमाई खा रहे है ,जिस दिन तुम मेहनत करके लाओगे तब में समझूगी की ताजी खाना खाया है।
फिर उसका पति अपनी पत्नी की बातो पर विचार करने लगा।
और फिर उसने अपनी माँ से कहा – ” माँ में दूसरे शहर कमाई करने जा रहा हूँ।

माँ ने कहा – ” बेटा हमारे पास तो इतना धन है फिर तुम क्यों दूसरे नगर जाना चाहते हो , पर बेटा नहीं माना और अपनी जिद पर अड़ा रहा।
फिर उसने अपनी पत्नी से कहा की जब तक में धन कमा के नहीं लाऊ तुम चूल्हे की आग को बुझने मत देना।

और वह दूसरे नगर को चला जाता हैं , और एक दिन चूल्हे की आग बुझ जाती हैं और उसकी पत्नी डर जाती हैं की कहीं मेरे पति किसी सकंट में तो नहीं फस गये हैं।

बहू ने सोचा की में जल्दी से पड़ोस के घर से आग ले आती हूँ और इस चूल्हे को जला देती हूँ ,और वह पड़ोस में गई ,और जाकर आग मांगने लगी। पड़ोसन ने कहा थोड़ी देर में आना।
क्योकि वह संकट चौथ व्रत ककी पूजा कर रही थी।

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फिर बहू ने कहा – आप यह क्या कर रही हो ?
पड़ोसन ने कहा – ” में संकट चौथ व्रत की पूजा कर रही हूँ। “
बहू ने कहा – ” यह व्रत क्यों करते है ? संकट चौथ व्रत की कथा
पड़ोसन ने कहा – ” इस व्रत से सभी कस्ट दूर हो जाते है ,और माँ अनपुरणा घर में आती हैं।

पड़ोसन के बात सुनकर बहू का भी मन हुआ की वह भी संकट चौथ व्रत की कथा संकट चौथ व्रत का व्रत करे।
फिर बहू ने संकट चौथ व्रत का व्रत रखा और शाम होने के बाद पूजा करने लगी और दीवार पर माँ चौथ की मूर्ति बना कर तिल और गुड़ ले के माँ चौथ की पूजा की और रात्रि में चद्रमा को जल देकर ,भोजन किया।

फिर एक दिन चौथ माता ने साहूकार के बेटे को सपने में कहा – “हे साहूकार के बेटे तो सो रहा हैं ,वह तेरी पत्नी तेरा इंतजार कर रही हैं ,घर जा के अपनी पत्नी की चिन्ता को दूर कर।

साहूकार के बेटे ने कहा – में कैसे जाऊ अभी तो मेरा हिसाब किताब भी नहीं हुआ है ?
चौथ माता ने कहा – ” तू जेक अपनी दूकान को खोल तेरा हिसाब किताब हो जाएगा फिर उसने अगले दिन अपनी दुकान खोली और सारा हिसाब – किताब हो गया और वह बैल गाड़ी में धन रख के अपने नगर को जाने लगा।

जैसे ही वह थोड़ी सी दूर गया रास्ते में एक नाग मिला और कहने लगा की तेरी आयु पूरी हो गाई हैं अब में तुझे ड़स लगा और तू मार जाएगा ,
तब साहूकार के बेटे ने कहा – ” की मुझे रात में चौथ माता ने दरसण दिये है और मेरी पत्नी मेरा इंतजार कर रही हैं।

तू मुझे जाने दे में फिर आ जाऊगा तब तू मुझे डस लेना ,नाग ने कहा – ” तू वादा कर के जा की फिर वापस आएगा ,उसने उस नाग को वादा कर दिया और वह स्व चला गया।

जब वह अपनी घर आ गया सब ने उसका स्वागत किया और खाना खाने बैठ गए ,साहूकार का बेटा बड़ा ही उदाश था तब उसकी [पत्नी ने पूछा – ” की आप इतने उदाश क्यों हो ?
तब उसने सारी बात अपनी पत्नी को बता दी , पत्नी ने कहा आप चिंता मत करो और लेट जाओ। फिर उसकी पत्नी ने सात सीढ़ी पर एक -पर रेत ,दूसरी पर- तेल ,तीसरी पर – गुलाल ,चौथी पर – लड्डू ,पांचवी पर – केसर ,छठी पर – दूध ,सातवीं पर – फूल और अपने कमरे में बैठ गई।

जैसे ही नाग कमरे की तरफ आने लगा तो वह एक एक कर सातो सीढ़ीओ पर आराम करते हुए आया। और कहता रहा में डसुगा जरूर , और फिर चौथ माता ,गणेश जी भगवान और चन्दमा यह सब देख रहे थे।

फिर उन तीनो ने सोचा अगर हमने इस साहूकार के बेटे की रक्षा नहीं की तो हमारा व्रत कौन करेगा और कौन हमें पूजेगा।

फिर जैसे ही नाग कमरे की तरफ जाने लगा तब चंदमा ने उजाला किया और और चौथ माता ने रोका और श्री गणेश जी भगवान ने तलवार से उसकी गर्दन को काट दिया। और एक ढाल से ढक दिया।

अगले दिन जब साहूकार के घर उसके बेटे से मिलने उसके दोस्त आये तो दोनों पति पत्नी कमरे में सो रहे थे , तब साहूकार की पत्नी ऊपर आने लगी तो देखा की सीढ़ियों पर यह सब क्या हो रहा है तब वह डर गई ,और बहू – बेटे
को आवाज लगाने लगी।

जब दोनों उठके आये तो देखा साप मारा पड़ा है। फिर उन्होंने सारी बात बता दी फिर सभी संकट चौथ व्रत की कथा चौथ माता की जय जय कर करने लगे। और कहने

फिर जैसे ही नाग कमरे की तरफ जाने लगा तब चंदमा ने उजाला किया और और चौथ माता ने रोका और श्री गणेश जी भगवान ने तलवार से उसकी गर्दन को काट दिया।

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जब बेटा आर बहू दोनों आने लगे ,तो देखा की साप मारा पड़ा हैं, तब दोनों ने सारी संकट चौथ व्रत की कथा बात सबको बता दी ,सब चौथ माता की जय जय कार करने लगे ,और कहने लगे, की जैसे- अपने साहूकार के बेटे और बहू पर अपनी कृपा की , की है वैसे ही आप का व्रत करने वाले सभी भक्तो पर कृपा करना।

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संकट चौथ का व्रत Story of Sankat Chauth

संकट चौथ व्रत की कथा : संकट चौथ का व्रत स्त्रियों के द्वारा किया जाता है ,इस दिन स्त्रियाँ सुबह प्रातः काल उठकर नहा धोकर अपने घर के सारे काम करके ,भगवान श्री गणेश जी की पूजा करे और संकट चौथ माता की पूजा करे।
और अपने मन में यह दर्द सकप ले की वह पूरी निष्ठा के साथ चौथ माता का व्रत करेंगी ,और अपने मन में माता चौथ का नाम लेते रहे। साथ ही साथ गणेश जी का भी नाम लेते रहे।

और दिन भर उपवास करे ,और चाय भी पी सकते हैं ,आप और फल भी खा सकते है। और शाम को तिल और गुड़ का प्रसाद बना कर भगवान और चौथ माता को दे , इस व्रत में तिल के लड्डू ,तिल के बर्फी आदि बना सकते है। आप शाम के खाने में जैसे खीर पूरी सब्जी ,या कचौरी हलवा आदि बना कर खा सकते है।

संकट चौथ की पूजा – विधि Story of Sankat Chauth

संकट चौथ व्रत की कथा : संकट चौथ की पूजा में एक थाली ले और उसमे कुमकुम , घी ,अगर बाती ,गुड़ ,तिल ,एक लोटा जल, फूल पीले रग के। और पीले वस्त्र पहने ,एक मूर्ति गणेश जी की ,और एक रोली से आप जहा पूजा करेगे ,वहाँ पर आप माता चौथ की एक मूर्ति बना ले ,और पूजा शुरू कर दे , पूजा पूरी होने के बाद चौथ माता की कथा कहे और गणेश जी भगवान की भी कथा कहे ,

और बाद में आरती करके चद्रमा को अर्ग दे ,और फिर आप भोजन सभी लोगो को दे और बाद में खुद भोजन करे।

क्या संकट चौथ के व्रत में नमक खा सकते हैं ? Story of Sankat Chauth

संकट चौथ व्रत की कथा : भक्तो में आपको बता दू की इस व्रत में नमक खा सकते है एक समय भोजन कर सकते हैं लेकिन वह भोजन रात्रि में करना है। चद्रमा को अर्ग देने के बाद ही आप भोजन कर सकते हैं।
ऐसा माना जाता है ,की यह व्रत करवा चौथ के समान ही होता हैं। इसलिए यह व्रत करना चाहिए।

संकट चौथ का व्रत क्यों किया जाता है ? Story of Sankat Chauth

संकट चौथ व्रत की कथा : भक्तो ऐसा माना है ,की यह व्रत भगवान श्री गणेश जी ने जब माता गौरी और भगवान श्री भोलेनाथ के चारों तरफ प्रकिमा की थी तब भोलेनाथ ने उन्हें सभी देवो में सर्व श्रैष्ठ बताया था। उस दिन से ही यह संकट चौथ का व्रत को किया जाता है। और इस व्रत को करने से हमारे पति और बच्चो की लम्बी आयु होती है चौथ माता उनके सारे कस्ट हर लेती है।
और घर में सुःख समृद्धि बनी रहती है।

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श्री गणेश जी की कथा , संकट चौथ व्रत कथा

गरीब देवरानी और अमीर जेठानी की कहानी

संकट चौथ व्रत कथा : एक समय की बात है ,एक गाँव में एक परिवार रहा करता था। उस परिवार में एक देवरानी और एक जेठानी का परिवार रहा करता था ,देवरानी बहुत ही ज्यादा गरीब थी ,और जेठानी अमीर थी।

देवरानी अपनी जेठानी के यहाँ काम किया करती थी ,और वहाँ से जो भी खाना मिलता अपने बच्चो के लिये ले आया करती थी। वह रोजाना अपने घर का सारा काम करके जेठानी के घर काम करने को जाती थी।

एक दिन संकट चौथ माता का व्रत आ गया , और उसने संकट चौथ माता का व्रत रख लिया और वह अपनी जेठानी के घर काम करने को नहीं गई ,और जब वह काम करने नहीं गई तो भोजन कहा से आए ?

जब शाम को उसका पति घर आया और उसने बच्चो को रोता देखा तो उसे अपनी पत्नी पर बहुत ज्यादा गुसा आया ,और उसने अपनी पत्नी को बहुत ज्यादा मारा। की तुम काम करने क्यों नहीं गई ?
और उसने दिन में थोड़े से गुड़ और तिल के लड्डू बनाये थे ,वह भी बिना पूजा के ऐसे ही रखे रह गए। और वह रोती – रोती सो गई।

जब रात में वह सो रही थी तब गणेश जी भगवान उसके सपने में आये और कहा – ” की बेटी आज तो तुम्हारा संकट चौथ का व्रत है और तुम भूखी ही सो रही हो। “
फिर गणेश जी ने कहा – ” मुझे बहुत भूख लगी है में क्या खाऊ। ?
देवरानी ने कहा – ” रसोई में गुड़ और लड्डू रखे है उन्हें खा लो। “
गणेश जी ने फिर से कहा – ” मुझे जोर से लगी है कहा करू ?
देवरानी ने कहा – ” कही भी कर लो पूरा घर पड़ा है। “
गणेश जी ने कहा – ” में कहा पोंछू ?
देवरानी ने कहा – “मेरे सर से पोंछ लो। “

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और गणेश जी वह से चले गए ,जब सुबह हुई तो देवरानी ने देखा पूरा घर हीरे जवारहात से भरा है। और वह उन सब को बटोरने में लग गई।
उसे और उसके परिवार को हीरे जवाहरात बटोरते – बटोरते दोपहर हो गई।

जब वह अपनी जेठानी के घर काम करने नहीं गई तो जेठानी ने अपना लड़का भेजा जानने के लिए ,तब वह अपनी चाची के घर गया तो देखा की सब लोग हीरे और जवाहरात भरने में लगे है तब उसने अपनी चाची से कहा – ” चाची काम करने क्यों नहीं आ रही हो ममी ने कहा है ?
चाची ने कहा – ” अब मझे तुम्हारे घर काम करने की जरुरत नहीं है। “
और वह लड़का वहाँ से चला जाता है और सारी बात अपनी ममी को बता देता है।

जब वह अपनी देवरानी के पास आई और उससे सारी बात पूछ ली।
अगले दिन उसने भी संकट चौथ माता का व्रत किया ,और गणेश जी के लिए देसी घी के तिल वाले लड्डू बनाये।
और अपने पति से कहा – ” सुनो जी आप मुझे बहुत ज्यादा मारो ,पति ने कहा – ” मैने आज तक तुन्हे एक ऊगली भी नहीं उठायी है और तुम मुझे मरने को कह रही हो। “
पत्नी ने कहा – ” हां मुझे मारो। “
पति ने फिर अपनी पत्नी को बहुत ज्यादा मारा और वह रोते – रोते सो गई आधी रात में गणेश जी ने उसे सपने में कहा – ” मुझे भूख लगी है। “
जेठानी ने कहा – ” देसी घी के लड्डू रखे है खा लो। “
गणेश जी ने कहा – ” मुझे लगी है कहा करू ?
जेठानी ने कहा – ” पूरा घर पड़ा है कही भी कर लो। “
गणेश जी ने कहा – ” अब में कहा पोंछू ?
जेठानी ने कहा – ” मेरे सर पर पोंछ दो। “
गणेश जी ने सर से पोंछ दिया और वहाँ से चले गए।

अगले दिन जब वह सो के उठे तो देखा पूरा घर गन्दी बदबू से भरा पड़ा है।
और वह बहुत ही ज्यादा निराश हुई और गणेश जी से कहा – की आप ने मेरे साथ छल किया हैं। “
गणेश जी ने कहा – ” की तुम घमंडी हो ,तुमने जान बूझकर अपने पति से मार खाई है। “
जेठानी ने अपने करे की माफ़ी माँगी और सब कुछ ठीक करने को कहा।
गणेश जी ने कहा -‘ ठीक है, में सब कुछ ठीक कर दुगा ,मगर तुम्हे अपनी जमीन और धन में से आधा हिंसा अपनी देवरानी को देना पड़ेगा और वह मान गई।

इस तरह उनके जीवन में सुःख और समृद्धि आ गई।

संकट चौथ व्रत कथा

आरती संकट चौथ माता की

ॐ जय संकट चौथ माता,
मैया जय संकट चौथ माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥

उमा, रमा, ब्रम्हाणी,
तुम ही जग माता ।
सूर्य चद्रंमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥
॥ॐ जय संकट चौथ माता…॥

दुर्गा रुप निरंजनि,
सुख-संपत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्याता,
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
॥ॐ जय संकट चौथ माता…॥

तुम ही पाताल निवासनी,
तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,
भव निधि की त्राता ॥
॥ॐ जय संकट चौथ माता…॥

जिस घर तुम रहती हो,
ताँहि में हैं सद्‍गुण आता ।
सब सभंव हो जाता,
मन नहीं घबराता ॥
॥ॐ जय संकट चौथ माता…॥

तुम बिन यज्ञ ना होता,
वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान का वैभव,
सब तुमसे आता ॥
॥ॐ जय संकट चौथ माता…॥

शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता ॥
॥ॐ जय संकट चौथ माता…॥

संकट चौथ जी की आरती,
जो कोई नर गाता ।
उँर आंनद समाता,
पाप उतर जाता ॥
॥ॐ जय संकट चौथ माता…॥

ॐ जय संकट चौथ माता,
मैया जय संकट चौथ माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥

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