108 भागवत गीता श्लोक हिंदी में – Bhagwat Geeta Shlok in hindi – Shrimad Bhagwat Gita

Bhagwat Geeta Shlok : कहा जाता है की भागवत गीता सिर्फ एक धर्म के लिए नहीं है।
बल्कि इसे धरती के हर इंसान को पढ़ना और समझना चाहिए ताकि वह अपनी ज़िन्दगी में सुख और सफलता को प्राप्त कर सके।

Bhagwat Geeta Shlok in hindi
Bhagwat Geeta Shlok in hindi

भागवत गीता में कुल 18 अध्याय हैं और इन सभी अध्यायों में कुल 700 श्लोक हैं, जो सभी के लिए पढ़ पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, इसीलिए हम भागवत गीता के १०८ विचारों के बारे में बात करगें जिन्हे जानकार आप भागवत गीता का मलतब समझ पाएंगे, इसीलिए इसे आपको रोज पढ़ना चाहिए।

108 Bhagwat Geeta Shlok in hindi – भागवत गीता श्लोक

श्री कृष्ण कहते हैं

जो बीत गया उस पर दुःख क्यूँ करना,
जो है उस पर अहंकार क्यों करना,
और जो आने वाला है
उसका मोह क्यों करना।।

हर मनुष्य के जीवन मे
नकारात्मक विचारो का आना निश्चित होता है
लेकिन ये मनुष्य पर निर्भर करता है
की वो उन विचरो को कितना महत्व देता है !!

इस भौतिक संसार का
सिर्फ एक ही अटल नियम है
की जो भी वस्तु जन्म लेती है
वो सिर्फ कुछ सयम तक ही रहती है
उसके पश्चात् उसका अंत होता निश्चित है
फिर चाहे वो मनुष्य का शरीर हो या फल !!

मनुष्य अपना दिल से जो दान कर सकता है
वो अपने हाथो से नहीं कर सकता
और मोन रहकर जो कुछ वो कर सकता है
वो शब्दों से नहीं कर सकता।

जब तक आप अच्छा काम करते हैं
तब तक चिंता न करें।

जो भी होता है
सब कुछ किसी कारण से होता है
इसीलिए परिणाम को ठीक करने के लिए
कारण को ठीक करें।

आप वापिस नहीं जा सकते
और शुरुआत को बदल नहीं सकते
लेकिन आप जहाँ है
वहीँ से शुरू कर सकते हैं
और आने वाले समय को
जरूर बदल सकते हैं।

बुराई बड़ी हो या छोटी
हमेशा विनाश का कारन बनती है
क्यूंकि नाव में छेद छोटा हो या बड़ा
नाव को डूबा ही देता है।

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Bhagwat Geeta Shlok in hindiShrimad Bhagwat Gita

जो अच्छा लगे उसे ग्रहण करो
और जो बुरा लगे उसे त्याग दो
फिर चाहे वो विचार हो कर्म हो या फिर मनुष्य।

जो इंसान साफ़ और सीधी बात करता है
उसकी बात कठोर जरूर होती है
लेकिन वो कभी किसी के साथ
छल नहीं करता।

परेशानी से सब्र करना
खुशहाली से दया करना
दान और संकट में सहनशीलता
उत्तम इंसान की पहचान होती है।

जीवन में अगर खुश रहना है
तो ज्यादा ध्यान उसी चीज पर दें
जो आपको ख़ुशी देती है।

जीवन में सब कुछ ख़त्म होने जैसा कुछ नहीं है
याद रहे हमेषा एक नै शुरुवात
आपके इंतज़ार में खड़ी है।

प्यार शरीर या सुंदरता को देखकर नहीं होता
दिल से होता है
जहाँ दो दिल मिल जाए
वहीँ प्रेम जन्म लेता है।

किसी भी इंसान को अच्छे से जाने बिना
दूसरों की बातें सुनकर
उसके बारे में कोई सोच बना लेना
यही मूर्खता की निशानी है।

दो तरह के लोग
इस दुनिया में स्वर्ग से भी ऊपर हैं
एक वो : जो शक्तिशाली होकर भी माफ़ कर देते है
और दूसरे वो : जो गरीब होकर भी कुछ दान करते हैं।

अकेले रहना तुम्हे ये भी सिखाता है
की वास्तव में तुम्हारे पास
खुद के अलावा और कुछ भी नहीं है।

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Bhagwat Geeta Shlok in hindiShrimad Bhagwat Gita

सेवा सबकी करो मगर
आशा किसी से मत करो क्योंकि
सेवा का सही फल मैं ही देता हूँ।

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रोना बंद करो और
अपनी तकलीफों से लड़ना सीखो।

हो सकता है हर दिन अच्छा ना हो
लेकिन हर दिन में कुछ अच्छा जरूर होता है।

खुद को कभी मकज़ोर ना समझें
अगर आप गिरते हैं तो उठने की कोशिश करें
पूरी निष्ठा से अपना कर्म करें
और बाकी सब मुझ पर छोड़ दें।

अपनी परेशानी के लिए
दूसरों को डिश मत दीजिये
अपने मन को समझाएं
आपके मन का बदलाव ही
आपके दुखो का अंत है।

आपका विश्वास एक पहाड़ को भी हिला सकता है
लेकिन आपके मन का शक
दूसरा पहाड़ भी खड़ा कर सकता हैं।

वक़्त से पहले मिली चीज अपना मूल्य खो देती है
और वक़्त के बाद मिली चीज अपना महत्व
इसीलिए समय की कदर करें
और काम को समय पर करने की कोशिश करें।

जैसे जल में तैरती नाव को
अगर सही दिशा में काबू न किया जाए तो
तूफान उसे उसके किनारे से दूर ले जाता है
ठीक वैसे ही इन्द्रियों पर काबू रखते हुए
अगर उसे सही दिशा में नहीं मोड़ा जाए
तो इन्द्रियां सुखी इंसान को
गलत रास्ते की तरफ ले जाती है।

जो लोग बूढी को छोड़कर
भावनाओं में बाह जाते हैं
उन्हें हर कोई मुर्ख बना सकता है।

हमेशा याद रखना
बेहतरीन दिनों केलिए
बुरे दिनों से लड़ना पड़ता है।

सिखने का सबसे बड़ा रास्ता
आपने अपने विचार हैं
इसीलिए बड़ा सोचे
और खुद को जितने के लिए
हमेशा प्रेरित करें।

Shrimad Bhagwat GitaBhagwat Geeta Shlok

सबसे समझदार इंसान वही है
जो सफलता मिलने पर अहंकार में नहीं आता
और असफलता मिलने पर
गम में नहीं दुब जाता।

निंदा से घबराकर अपने लक्ष्य को न छोड़ें
क्यूंकि लक्ष्य मिलते ही
निंदा करने वालों की राय बदल जाती है।

समय यही सिखाता है
की ज़िन्दगी किसी का इंतज़ार नहीं करती
और न ही किसी के लिए रुक सकती है

जो जितना शांत होता है
वो उतनी ही गहराई से
अपनी बुद्धि का प्रयोग कर सकता है।

अगर आप अपनी गलतियों से कुछ सीखते हो
तो गलतियां सीढ़ियां बनती है
और अगर नहीं सीखते
तो गलतियां सागर है
फैसला आपका है चढ़ना है या डूबना है।

आत्मा का वध कभी भी नहीं किया जा सकता
इसीलिए तुम्हें किसी भी जिव के लिए
शोक करने की जरुरत नहीं है।

मनुष्य की मानवता उसी वक़्त ख़त्म हो जाती है
जब उसे दूसरों के दुःख पर
हंसी आने लगती है।

जब हमारा मन कमजोर होता है
तब परिस्तिथियाँ समस्या बन जाती है
और जब हमारा मन कठोर होता है
तब परिस्तिथियाँ चुनौती बन जाती है
जब हमारा मन मजबूत होता है
तब परिस्तिथियाँ अवसर बन जाती है।

Shrimad Bhagwat GitaBhagwat Geeta Shlok

जब भविष्य साफ ना दिखे तो अपने
आज को बेहतर बनाने में लग जाएँ।

इंसान नहीं उसके कर्म अच्छे या बुरे होते हैं
और जैसे इंसान के कर्म होते है
उसे वैसे ही फल मिलते हैं।

इस पूरी दुनिया में कोई भी
पूरी तरह से सही नहीं है
इसलिए लोगों की अच्छाइयों को देखते हुए
उनके साथ अच्छे रिश्ते बनाएं।

जितना हो सके खामोश रहना अच्छा है
क्यूंकि सबसे जयादा गुनाह
इंसान से उसकी ज़ुबान ही करवाती है।

अच्छी नियत से किया गया काम
कभी भी ख़राब नहीं जाता
और उसका फल आपको जरूर मिलता है।

किसी चीज के बारे में सोचते रहने से
इंसान उसकी तरफ आकर्षित होने लगता है
और पाने की इच्छा बढ़ने लगती है
इसीलिए कर्म और परिवर्तन से
जुड़े विचारों को ही सोचें।

जब समझदार इंसान रिश्ते निभाना बंद कर देता है
तो समझ लें चाहिए कहीं न कहीं उसके
आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है।

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कौन क्या कर रहा है
कैसे कर रहा है और क्यों कर रहा है
इन सब से आप जितना दूर रहेंगे
उतना ही आप खुश रहेंगे।

इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता
की आपके आस पास कितनी बुराई है
जब तक की वो बुराई
आपके अंदर न चली जाये।

108 भागवत गीता श्लोक – Bhagwat Geeta Shlok

आपके पास हमेशा समय होता है
ये सब हमारी प्राथमिकताओं का खेल है।

जो इंसान यह जानता है की
आत्मा हमेशा जीवित रहती है
वो किसी भी मरने से नहीं डरता
और हमेशा सच्चे मार्ग पर डटा रहता है।

सच्ची दोस्ती दुःख को आधा
और सुख को दो गुना कर देती है।

सब्र करो क्यूंकि जीवन में कभी कभी
शानदार परिणाम हासिल करने के लिए
बुरे हालातों से लड़ना भी जरुरी होता है।

कोई कुछ भी बोले, बस अपने काम के प्रति
लगन के साथ खुद को शांत रखो
क्यूंकि धुप कितनी ही तेज हो
समुन्द्र को सूखा नहीं सकती।

खुद से एक वादा करना
हमेषा ये जरूर समझना
की आप खुद कहाँ गलत हो।

इंसान का दिमाग ही सब कुछ है
जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है।

जब समय पलटता है
तो सब कुछ पलट देता है
इसीलिए अच्चे समय में घमंड ना करें
और बुरे वक़्त में सब्र जरूर करें।

जैसे समुद्र के पार जाने के लिए
नाव ही एक मात्र जरिया है
वैसे ही स्वर्ग में जाने के लिए
सत्य ही एक मात्र सीढ़ी है।

कर्म एक ऐसी फसल है
जिसे हर इंसान को
हर हाल में काटना ही पड़ता है
इसीलिए हमेशा अच्छे बीज बोयें।

108 भागवत गीता श्लोक – Bhagwat Geeta Shlok

अभिमान नहीं होना चाहिए की
मुझे किसी की जरुरत नहीं पड़ेगी
और यह वहम भी नहीं होना चाहिए
की सब को मेरी जरुरत पड़ेगी।

जिस तरह आग सोने को परखती है
ठीक उसी तरह
मुसीबत एक बहादुर इंसान को परखती है।

जीवन न तो भविष्य में है
न अतीत में है
जीवन तो बस इस पल में है

दान कर्तव्य समझकर बिना किसी शक के
किसी गरीब इंसान को दिया जाए
वही सच्चा दान है।

मैं कर सकता हूँ
ऐसा सोचना आत्मविश्वास की निशानी है
सिर्फ मैं ही कर सकता हूँ
यह सोचना घमंड है
आत्मविश्वाश को अपनाएं घमंड को नहीं

108 भागवत गीता श्लोक – Shrimad Bhagwat Gita

जिसने मन को जीत लिया है
उसने परमात्मा को प्राप्त कर लिया है
क्यूंकि उसने शांति प्राप्त कर ली है
ऐसे मनुष्य के लिए
सुख और दुःख मान और अपमान एक से है।

अच्छे कर्म करने के बावजूद भी कुछ लोग
सिर्फ आपकी बुराइयां ही याद रखेंगे
इसीलिए लोग क्या कहते है
इसपर ध्यान ना दें
और अपना कर्म करते रहें।

जिस तरह प्रकाश की ज्योति
अँधेरे में चमकती है
ठीक उसी तरह सच भी चमकता है
इसीलिए हमेशा सच की राह पर चलो।

हे पार्थ तुम फल की चिंता मत करो
अपना जरुरी कर्म करते रहो
मैं फल तुम्हे अवश्य दूंगा।

जो चीजें तुम्हारे दायरे से बहार हो
उसमें समय गंवाना मूर्खता है।

जो व्यव्हार आपको दूसरों से अपने लिए पसंद ना हो
ऐसा व्यव्हार दूसरों के साथ भी न करें।

मानव कल्याण ही
भागवत गीता का प्रमुख उद्देश्य है
इसीलिए मनुष्य को
अपने कर्तव्यों का पालन करते समय
मानव कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए।

108 भागवत गीता श्लोक – Bhagwat Geeta Shlok

सही कर्म वह नहीं हैं
जिसके परिणाम हमेशा सही हों
बल्कि सही कर्म वह हैं
जिसका उद्देश्य कभी गलत ना हो।

धरती पर जिस तरह मौसम में बदलाव आता है
ठीक उसी तरह जीवन में सुख और दुःख आते हैं।

न तो ये शरीर तुम्हारा है
और न ही तुम इस शरीर के मालिक हो
यह शरीर 5 तत्वों से बना है
आग, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश
और एक दिन यह शरीर इन्ही 5 तत्वों में मिल जायेगा
तुम्हारा सिर्फ कर्म है
इसीलिए अच्छे कर्म करने पर ध्यान दो।

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जिस इंसान के पास सब्र की ताकत है
उसकी ताकत का कोई मुकाबला नहीं कर सकता।

ज्यादा खुश होने पर और ज्यादा दुखी होने पर
फैसला नहीं लेना चाहिए
क्यूंकि यह दोनों परिस्तिथियां
आपको सही फैसला नहीं लेने देतीं।

जो होने वाला है वो होकर ही रहता है
और जो नहीं होने वाला वो कभी नहीं होता
जो ऐसा मानते है
उन्हें चिंता कभी नहीं सताती।

कोई भी अपने कर्म से भाग नहीं सकता
कर्मों के फल का भुगतान तो करना ही पड़ता है
इसीलिए अच्छे कर्म करो ताकि अच्छे फल मिल सके।

चुप रहने से बड़ा कोई जवाब नहीं है
और माफ़ कर देने से बड़ी कोई सजा नहीं है।

108 भागवत गीता श्लोक – Bhagwat Geeta Shlok

जब इंसान की जरुरत बदल जाती है
तब उसके बात करने का तरीका भी बदल जाता है।

बिना फल की कामना किये
कर्म करना ही सच्चा कर्म है।

वो जो सभी इक्छाएं त्याग देता है
“मैं और मेरा “
की लालसा और भावना से मुक्त हो जाता है
उसे शांति हासिल हो जाती है।

सिर्फ मन ही किसी का दोस्त और
किसी का दुश्मन होता है।

बुद्धिमान इंसान को समाज कल्याण के लिए
बिना लालच के कर्म करना चाहिए।

पैदा होने वाले के लिए मरना होता ही सच है
जितना की मरने वाले के लिए पैदा होना
इसीलिए जो सच है उस पर गम मत करो
उसे अपनाओ और आगे बढ़ो।

लगातार कोशिश करने से
अशांत मन को वश में किया जा सकता है।

नर्क के तीन रास्ते हैं
वासना, गुस्सा और लालच।

इंसान अपने विश्वास से अपना है
जैसा वो विश्वास करता है
वैसा वो बन जाता है।

अपना, पराया, छोटा, बड़ा, इन सबको भूलकर
ये जानो की यह सब तुम्हारा है
और तुम हर एक के हो
इसीलिए सभी से प्रेम करो
और सबका भला करने का प्रयास करो।

कोई भी व्यक्ति जन्म से नहीं
अपितु अपने कर्मो से महान बनता है।

हर इंसान को कर्म में विश्यास करना चाहिए
क्यूंकि ये जगत कर्मलोक है
कर्म आपके हाथ में है परिणाम नहीं
इसीलिए कर्म पर ध्यान लगाएं
और मेहनत निरंतर करते जाएँ।

जो इंसान फल की इक्छा का त्याग कर
सिर्फ कर्म पर ध्यान देता है
ऐसा इंसान जीवन में जरूर सफल होता है।

Shrimad Bhagwat GitaBhagwat Geeta Shlok

शक करने वाले इंसान के लिए
खुशी न इस दुनिया में है और न ही कही और
इसीलिए जो कर रहे हो उसमे विश्वास करो
या जिसमे विश्वाश हो उसी को करो।

अपने जरुरी कामों को पूरा करो
क्यूंकि वास्तव में काम करना
कुछ न करने से बेहतर होता है।

जीवन का आनंद ना तो
बीते हुए कल में है और ना ही भविष्य में
बल्कि जीवन का आनंद तो
बस आज को जीने में है।

श्री कृष्ण कहते हैं की हर वक़्त
अपनी कामनाओ और इक्छाओ में दुबे रहना
इंसान के सभी दुखों का कारन है
अगर वो इससे मुक्त होकर
अपना कर्तव्य निभाए
तभी उसका जीवन खुशहाल होगा।

जो मन को काबू में नहीं करते
उनके लिए उनका मन
एक दुश्मन के समान है।

सच्चा धर्म ये है
की जिन बातों को इंसान
अपने लिए अच्छा नहीं समझता
उन्हें दूसरों के लिए भी इस्तेमाल न करे।

अभ्यास से हर चीज को
नियंत्रित किया जा सकता है।

यदि कोई इंसान जो चाहता है
उसे विश्वास के साथ करता है
तो वो जो चाहे बन सकता है।

भगवान श्री कृष्ण कहतें है की
मेरे लिए सभी प्राणी एक जैसे है
ना तो कोई मुझे बहुत ज्यादा पसंद है
और न ही कम
लेकिन जो मेरी भक्ति पुरे मन से करता है
मैं हमेशा जरुरत पड़ने पर उसके काम आता हूँ।

तो आशा करता हूँ Bhagwat Geeta Shlok आपको अच्छे लगे होंगे और आपके विचारों में बदलाव लाएंगे। क्यूंकि Bhagwat Geeta Shlok को पढ़ने भर से नहीं अपितु अपने जीवन में उनका प्रयोग करना बहुत जरुरी है।

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